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गन्ना भुगतान किसानों का अधिकार, एहसान नहीं: कुमुद
- दैनिक लोक भारती
- 28 Jun, 2026
पीलीभीत। लंबे समय से गन्ना किसानों के बकाया भुगतान को लेकर आवाज उठा रहे कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने रविवार को मुख्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार और चीनी मिलों पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों का बकाया केवल धनराशि का मामला नहीं, बल्कि किसानों के श्रम, सम्मान और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
कांग्रेसी नेता कुमुद गंगवार ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवनयापन और आजीविका का अधिकार प्राप्त है। आरोप लगाया कि महीनों और वर्षों तक गन्ना भुगतान लंबित रहने से किसान आर्थिक संकट, कर्ज और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। कई किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, जो किसानों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
14 दिन में भुगतान न होने पर ब्याज देने का प्रावधान
कुमुद ने आगे कहा कि वैधानिक व्यवस्था के अनुसार यदि 14 दिन के भीतर गन्ना किसानों का भुगतान नहीं किया जाता, तो संबंधित चीनी मिल को किसानों को 15 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज के साथ भुगतान करना चाहिए। बावजूद इसके किसानों को समय पर उनका भुगतान नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि पीलीभीत और आसपास के क्षेत्रों के किसान गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। किसान अपनी फसल समय पर चीनी मिलों को सौंप देता है, लेकिन उसे अपनी मेहनत की कमाई के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ता है। इसका असर किसानों के परिवार, बच्चों की शिक्षा, खेती की लागत और बैंक ऋण अदायगी पर पड़ रहा है।
विभिन्न चीनी मिलों पर करोड़ों रुपये बकाया
कुमुद गंगवार ने बताया कि पेपर खेड़ा चीनी मिल पर किसानों का लगभग 125 करोड़ रुपये बकाया है। नवाबगंज चीनी मिल पर पिछले लगभग तीन वर्षों का करीब 70 करोड़ रुपये भुगतान लंबित है और मिल भी बंद हो चुकी है। इसके अलावा बरेली की एक बंद चीनी मिल पर करीब 170 करोड़ रुपये तथा मकसूदापुर स्थित चीनी मिल पर लगभग 120 करोड़ रुपये किसानों का बकाया बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर सैकड़ों करोड़ रुपये किसानों के भुगतान के रूप में अटके हुए हैं, जबकि किसान अपनी जिम्मेदारी पहले ही पूरी कर चुका है।
मुख्यमंत्री से मिलेगा किसानों का प्रतिनिधिमंडल
कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में मुख्यमंत्री का प्रस्तावित कार्यक्रम है और इस दौरान किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात कर गन्ना किसानों की समस्याओं से अवगत कराएगा। वहीं प्रशासन से अनुरोध किया जाएगा कि किसानों के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति दी जाए, ताकि लंबित भुगतान, बंद चीनी मिलों के बकाये और किसानों के वैधानिक अधिकारों के संबंध में ठोस एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराई जा सके।
किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़
कुमुद गंगवार ने कहा कि किसान किसी विशेष कृपा की मांग नहीं कर रहा, बल्कि अपने श्रम का न्यायसंगत मूल्य चाहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए न्यायपूर्ण समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगी। किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज की रीढ़ है।
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